इस धरती पर "चमन चुतिया" नाम की एक प्रजाति है। जाहिर है उस प्रजाति के कुछ बहादुर फेसबुक पर भी दूकान सजायेंगे। इसे संयोग ही जानिये कि इनकी अधिकांश आबादी कजरी सर की पार्टी के पोस्ट परोसती हैं, बिना अपनी अक्ल का छौंका लगाये।
आज महात्माजी लोग *सुषमा_बेल्स_ललित ट्रेंड करा रहे हैं और ललित मोदी की ठरकी छाप फोटो चेप रहे हैं---"यही है ह्यूमनिटेरिअन ग्राउंड?"।
सीधा-सीधा बता दूँ, ललित मोदी ने सूटकेस भेजा नहीं अभी तक--- तोतले की तो मैं सोनिया-प्रियंका कर दूँगा आज। IPL जिसके भी दिमाग की उपज हो, क्रिकेट और क्रिकेटर्स पर बहुत चमत्कार किया इस मेले ने। ITC होटल में काम करने वाले मित्र बताते थे गौरांगी विदेशीन बालाओं की चहलकदमी रात 3-4 बजे तक। क्या खिलाड़ी, टीम मेनेजर, जिसे जहाँ देखो गंध मचा रहा है। दारू बह रही है। बड़े रसूख वाले लोग होते थे, जिसे देखो शरद पवार का नाती बना फिरता था।
आज भी याद है IPL 1, ऑफिस में सब प्लान कर रहे थे स्टेडियम में मैच देखने का। बखान भी कर रहे थे, फुल्टू पैसा वसूल है(तब टिकट भी सस्ती थी और चीयर डांसर्स आपके पसंद से 'नाचती' थी)। सबकुछ सही चल रहा था ललितवा के हक़ में, बीबी-cum-चाची भी इसकी मटरगश्ती के बीच में बाधा नहीं देती थी पर क्या खुजली हुयी लौंडे को---- पंगा ले लिया राजनीति के घाघ कांग्रेस से। कचहरी में मामले चले, जान की धमकी मिली सो अलग। लौंडे को अक्ल आयी---- ये क्या कर बैठा, बीबी-बच्चे तक को खा जाते है कांग्रेसी, मुझे तो बिना नून-मिरचाई लील लेंगे। ठान लिया जवान ने--- हम इंग्लैण्ड में रहूँगा और वकील साहब केस लड़ेंगे। मोनिया माई बौराईं--- पासपोर्ट जब्त करो इसका। कौन सा मेरे मायके का है या मेरे खसम का लंगोटिया।
ललितवा जज से करबद्ध---- माई-बाप, बचाय लो हमका। क़ानून का राज में दादागिरी करता है ई लोग, पहिले हमसे सटके रहता था--अब जान के पीछे है। कोर्ट बोला--- जा बेटवा, जी ले अपनी ज़िन्दगी।
बरस तीन बरस बीते, वकील साहब केस लड़ते रहे और ललितवा इंग्लैण्ड में ऐश करता रहा। बीबी-cum-चाची की कैंसर में विस्फोट हुआ। अपना हीरो बोला-- एक बार तो पतिधर्म निभा लूँ। हे जॉर्ज पंचम के नाती, मुझे लिस्बन जाने का कागज़ पत्तर दो, वापिस आप ही के यहाँ आऊंगा--- यहाँ बड़ा आराम है।
भारत में सत्ता बदलने के बाद सबका व्यवहार बदल गया, अंग्रेज भी फॉर्मेलिटी के नाते पूछ लिये-- ऐ मोदी, इस रंगीन अदमी को बीमार बीबी का ऑपरेशन करवाने भेजा तो कट्टी तो नहीं करेगा। व्यापार-व्यवहार में कमी तो नहीं करेगा। सुषमा बोली, ईलाज कराने दो, बुरा नहीं मानूँगी। वैसे भी भागा नहीं है, हर तारीख पर हाजिरा देता है। पप्पू, पप्पी और आप्पी बोलता है--- ललितवा तो अंडरसन काका और कुतरोची मामा जैसा फेयर काम्प्लेक्सन नहीं है। उसको रियायत क्यूँ दिया?
ई सुषमा अपना सगा NSCN(K) का बहुत लॉस करवाई है। इसका विकेट चाहिये ही चाहिये।
आज महात्माजी लोग *सुषमा_बेल्स_ललित ट्रेंड करा रहे हैं और ललित मोदी की ठरकी छाप फोटो चेप रहे हैं---"यही है ह्यूमनिटेरिअन ग्राउंड?"।
सीधा-सीधा बता दूँ, ललित मोदी ने सूटकेस भेजा नहीं अभी तक--- तोतले की तो मैं सोनिया-प्रियंका कर दूँगा आज। IPL जिसके भी दिमाग की उपज हो, क्रिकेट और क्रिकेटर्स पर बहुत चमत्कार किया इस मेले ने। ITC होटल में काम करने वाले मित्र बताते थे गौरांगी विदेशीन बालाओं की चहलकदमी रात 3-4 बजे तक। क्या खिलाड़ी, टीम मेनेजर, जिसे जहाँ देखो गंध मचा रहा है। दारू बह रही है। बड़े रसूख वाले लोग होते थे, जिसे देखो शरद पवार का नाती बना फिरता था।
आज भी याद है IPL 1, ऑफिस में सब प्लान कर रहे थे स्टेडियम में मैच देखने का। बखान भी कर रहे थे, फुल्टू पैसा वसूल है(तब टिकट भी सस्ती थी और चीयर डांसर्स आपके पसंद से 'नाचती' थी)। सबकुछ सही चल रहा था ललितवा के हक़ में, बीबी-cum-चाची भी इसकी मटरगश्ती के बीच में बाधा नहीं देती थी पर क्या खुजली हुयी लौंडे को---- पंगा ले लिया राजनीति के घाघ कांग्रेस से। कचहरी में मामले चले, जान की धमकी मिली सो अलग। लौंडे को अक्ल आयी---- ये क्या कर बैठा, बीबी-बच्चे तक को खा जाते है कांग्रेसी, मुझे तो बिना नून-मिरचाई लील लेंगे। ठान लिया जवान ने--- हम इंग्लैण्ड में रहूँगा और वकील साहब केस लड़ेंगे। मोनिया माई बौराईं--- पासपोर्ट जब्त करो इसका। कौन सा मेरे मायके का है या मेरे खसम का लंगोटिया।
ललितवा जज से करबद्ध---- माई-बाप, बचाय लो हमका। क़ानून का राज में दादागिरी करता है ई लोग, पहिले हमसे सटके रहता था--अब जान के पीछे है। कोर्ट बोला--- जा बेटवा, जी ले अपनी ज़िन्दगी।
बरस तीन बरस बीते, वकील साहब केस लड़ते रहे और ललितवा इंग्लैण्ड में ऐश करता रहा। बीबी-cum-चाची की कैंसर में विस्फोट हुआ। अपना हीरो बोला-- एक बार तो पतिधर्म निभा लूँ। हे जॉर्ज पंचम के नाती, मुझे लिस्बन जाने का कागज़ पत्तर दो, वापिस आप ही के यहाँ आऊंगा--- यहाँ बड़ा आराम है।
भारत में सत्ता बदलने के बाद सबका व्यवहार बदल गया, अंग्रेज भी फॉर्मेलिटी के नाते पूछ लिये-- ऐ मोदी, इस रंगीन अदमी को बीमार बीबी का ऑपरेशन करवाने भेजा तो कट्टी तो नहीं करेगा। व्यापार-व्यवहार में कमी तो नहीं करेगा। सुषमा बोली, ईलाज कराने दो, बुरा नहीं मानूँगी। वैसे भी भागा नहीं है, हर तारीख पर हाजिरा देता है। पप्पू, पप्पी और आप्पी बोलता है--- ललितवा तो अंडरसन काका और कुतरोची मामा जैसा फेयर काम्प्लेक्सन नहीं है। उसको रियायत क्यूँ दिया?
ई सुषमा अपना सगा NSCN(K) का बहुत लॉस करवाई है। इसका विकेट चाहिये ही चाहिये।
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