Saturday, April 4, 2015

General Election results (2014)

Written on 16-May 2014

I have witnessed the freedom from Monstrous Congress rule. It started against the dictatorial behaviour of Indira Gandhi in 1975 by denying Democratic rights to People of India.
My father as a 21 year old student activist under guidance of JP was arrested for 19 months.

Pitashree, your political prisoners' pension has attained the real worth today. & I as a fighting son feel like squirrel in Shri Ram's army.

~Feeling emotional.

Friday, April 3, 2015

सुनाम

बैशाखी आनेवाली है, पिछली २ बैशाखी से मैं आपको हुतात्मा ऊधम सिंहजी के 1 ग्रामीण के विषय में बताना चाह रहा था।

२०१२ के अगस्त महीने में मित्र से मिलने मुंबई गया था। वासी से एयरपोर्ट आने के लिए स्टैंड से १ टैक्सी ली। गुरुदयाल नाम था उन टैक्सी चालक का(शायद उस स्टैंड के नेता थे), बड़े ही अनुभवी, मिलनसार और सौम्य।
टैक्सी शुरू होने के पहले ही हमारी बातें चालू हो गयीं। पत्नी ने पिछली सीट पर डेरा जमाया और मैं गुरुदयालजी के बगलवाली सीट पर। स्वभावतः मैंने पूछ लिया, "कहाँ से हैं आप"?

सहजता से जवाब दिया--- "आप नहीं जानते होंगे भाई साहब, छोटी सी जगह है--- संगरूर" …
मैंने उनके चेहरे पर मानो ख़ुशी बरसा दी अपनी प्रतिक्रिया से -------"कैसे नहीं जानूँगा  …… ऊधम सिंहजी का गाँव सुनाम तो संगरूर में ही है ना....."
तपाक से बोले---- "मैं सुनाम से हूँ.…"

हम दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता छा गयी। मैं खुश था क्यूंकि मुझे महान क्रांतिकारी के ग्रामीण के दर्शन का सौभाग्य मिला।  वे संतुष्ट थे कि कोई तो है जो ऊधम सिंहजी की बलिदान गाथा जानता है। … सच भी है, हमारे पाठ्यक्रम की पुस्तकों ने सेनानियों का मान नहीं किया। पलक झपकते ही हम वासी और मुंबई के टोल ब्रिज को पार कर रहे थे और इशारों से गुरुदयालजी ने बताया कि बांग्लादेश से आये घुसपैठिये इन जगहों पर ठिकाना लेते हैं फिर झुग्गियों में जाते हैं, कुछ झुग्गियां भी रास्ते से दिखायीं।  ५०(50) के आस-पास उम्र होगी, ३० साल खाड़ी-देशों में क्रेन ऑपरेटर का काम करने के बाद स्वदेश लौटे थे, थोड़ी जमापूँजी और इस्लामिक देश में गैर-मुसलमान की हालत को जेहन में संजोये।

ढ़ेर सारी बातें, मानो हम वर्षों से जानते हों एक-दूसरे को। बातें रह रहकर अवैध घुसपैठ और इसके समूल निराकरण पर आ जाती, उनकी चिन्ता जायज थी। भाजपा को विकल्प के रूप में पूछने पर उनका जवाब था ---"पार्टी और नेता तो औरों से अच्छे है, पर बूढ़े और निष्प्राण हो चुके हैं  " …… बिना किसी अधिकार के मैंने अपनी तरफ से आश्वासन दे दिया-- "दिसंबर का गुजरात चुनाव हो जाने दीजिये, मोदीजी नेता होंगे भाजपा के" …… (गजब सी संतुष्टि दोनों के चेहरे पर)

पहली बार मैं चाह रहा था कि आज एयरपोर्ट थोड़ी दूर खिसक जाये, किसी चौराहे पर बाधा मिल जाये  .... मैं उनके अनुभव सुनता रहूँ। खैर, मैं मंजिल तक आ चुका  था और उन्होंने जोरदार विदाई दी।

बातचीत का ब्यौरा फिर कभी। … फिलहाल आप सुनाम, भाभरा, हुसैनीवाला, खेड, नैहाटी इत्यादि गाँवों  और उनके सपूतों के विषय में पढ़िये ताकि इन पवित्र भूमि से आया कोई बंधू आपसे संकोच ना करे।