Tuesday, March 25, 2014
केजरीवाल की बनारस यात्रा
साथियों, आज AK सर की लंका लग गयी। पहले तो 1100₹ वाला 'दिल्ली-काशी टूर पैकेज' ढंग से नहीं बिका। फिर किसी संघी ने खबर लीक कर दी कि कजरी सर कोई त्याग के देवता-वेवता कुछ नहीं, बस बकड़ करते रहते हैं। आम मुख्यमंत्री के कोटे से 4 टिकट ही तो टपाई थी, उसके लिये इतना घोर अपमान।
भाभीजी ने 2.58 लाख किराये के आम बंगले के बाथरूम पर ताला जड़ दिया था (700 लीटर रोज़ाना वाला तर्क चिपकाकर) सो बिना धोये-पोछे निकलना पड़ा। खैर, सारा मामला फिट था, कुछ चपंडुकों को पहले से बता रखा था कि सांप्रदायिक गंगा में डुबकी के पहले सिर पर 2 अंडे फोड़ना-- बाल काल-घने और मुल्लायम रहते हैं। नासपीटों ने देरी कर दी-नयी नवेली टोपी से अभी तक मुर्गी की पोटी भकभका रही है। क्रान्ति के लिये यह भी सही।
पहलवान सनिमा का शौक़ीन है इसलिये 'हीरो' पर 'गुंडों' द्वारा हमले का आयोजन उसके जिम्मे दिया, लेकिन गधे ने वही घिसा पिटा इंक वाला 'अटैक' करवाया जिसको 2 सप्ताह पहले भाजपाई लौंडों ने सोशल मीडिया पर उजागर कर दिया था। मोदी को गाली देने का सारा प्लान धरा का धरा रह गया, कोई सीरियसली ले ही नहीं रहा 'क्रांति' पर हुए हमले को।
मुर्गी की पोटी तो हम फिर भी झेल जाते, पर हमारा ही एक क्रांतिकारी कदम आत्मघाती साबित हो गया। एक ठरकी किस्म के साथी की सलाह पर कैमरों की फ़्लैशलाइट में डुबकी क्या ली, सामूहिक रूप से इज्ज़त की सोनिया-प्रियंका कर दी। कोई हेयरलेस युगपुरुष छाती की तुलना कसाई की छाती से कर रहा है, कोई वक्ष की गोलाईयाँ सनी लीओन से माप रहा है। बहुत डाउन चल रहे हैं AK49जी।
'पापी मत्सुन दारुपेयी' को बोला था धूर्त किस्म की 'उबलती' हुयी 'चाटुकार' को 2 दिन पहले भेजकर कुछ माहौल बनाओ पक्ष में। बेड़ा गर्क जाये करमजली का, बनारस सांप्रदायिक विश्वविद्यालय में जोश भरकर 4 वोट ना जुगाड़ पायी।
अब भी कुछ नहीं बिगड़ा था, 1100 ₹ खर्चकर पैकेज टूर पर आये कार्यकर्ताओं का भरोसा था। वोट ना दे सकें तो क्या, गगनचुम्बी नारे तो बुलंद करेंगे काशी में।..... गर्ररर्ररर, किसी संघी ने इनको काशी की प्रसिद्ध जलेबी-दही के अपूर्व स्वाद की बात बता दी और सुबह सुबह भकोसने पहुँच गए हंगले। मैदान में कजरी सर की प्रश्नोत्तरी के समय ऊँघ लिये आधे पेटू। टाइमिंग तो जबरदस्त चुनी थी AK सर ने- पीछे मगरिब की अज़ान के पाक समय पर बचे खुचे टूरिस्टों की बदौलत ऐलान कर देंगे। पर तभी किसी संघी ठेलेवाले ने "मोदी आनेवाला है" ट्रैक बजा दिया।
कल गुडगाँव में जली 250 converted बेईमानों की टोपियाँ और आज के घटनाक्रम ने युगपुरुष को झुलसा दिया है। ऐसे आयेगी क्रांति? कैसे आयेगी क्रांति?!?
खैर शाम को शुकून देनेवाली कुछ सेक्युलर मुलाकातें हैं। कल हम बुनकरों की समस्या सुलझाएंगे। हालांकि अभी यह पता नहीं है कि समस्याएँ क्या हैं पर 'आप' तो जानते ही हैं हर समस्या का समाधान - अम्बानी को गाली देना(क्यूंकि गुजराती को गाली दिया तो मोदी आउट) और जनलोकपाल(जिससे हमने सिंगापुर के 142 मंत्री जेल भेजे थे)। क्या कहा भारत में लोकपाल कानून 2 महीने पहले बन चुका है---भाई हम संसद को कब मानते हैं।
साथियों, आज सोशल मीडिया पर भी हमारे 20-हजारी कॉपी-पेस्ट कार्यकर्ताओं का निकम्मापन दिखा। भाजपाई कलाकार
"डर डर कजरी, थर थर कजरी"
जैसे स्लोगन बम मार मारकर दिमाग का 'लोटस' कर रहे थे और ये अहमक किसी चमत्कार(जैसे, इन्टरनेट सेवा ठप्प होना) की प्रतीक्षा कर रहे थे।
या अहमद, दे मदद।
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हमने इस पोस्ट को शेयर करने की परमिशन CIA और पाकिस्तानी आकाओं से ले ली है।
Day 2 की रिपोर्ट कल आयेगी।
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